कर्म का फल

उदयपुर गाँव में एक छोटा-सा परिवार रहता था| परिवार में बुढें माँ- बाप और उसका बेटा का परिवार रहता था| बेटा मोहन के बर्ताव से उसका परिवार काफी चंत्तित रहता था| उसके कारण घर में काफी कलैश होती रहती थी| कुछ दिन बाद उसकी माँ का देहांत हो गया लेकिन उसने अपनी आदतें न बदली| वह पेशे से मोची का काम करता था| घर में उतने पैसे नहीं थे जिससे उसके घर का खर्च निकल सके | वह जितना भी कमाता उसे बुरी चीजों में खर्च कर देता| उसके बुढें पिता इतने कमज़ोर थे जो उनसे सही से चला भी न जाता था| और वह उन्हें दो वक्त की रोटी भी न खिला पाता था| और उपर से अपने पिता के साथ गाली गलौज करता था| जिससे उसके पिता की स्थिति  काफी नाजुक हो गई थी|

मोहन को एक छोटा लड़का गणेश था| जो उम्र में काफी छोटा था|और स्वभाव से बिल्कुल अपने पिता के विपरीत था| वह अपने दादा जी से काफी प्यार करता था और उनकी सही से देखभाल भी करता था|  महज आठ साल की उम्र में में ही  अपने पिता के बर्ताव से परेशान रहता था| उसे यह अच्छा नहीं लगता था कि उसके पिता उसके दादा जी से ऐसा बर्ताव करते है क|

एक दिन मोहन के पिता की तबियत काफी नाजुक हो गई और उसने अपने बेटे से डाॅक्टर के पास ले जाने की आग्रह की| उसके बेटे ने इस बात से भी इनकार कर दिया और उन्हें डाँट फटकार कर चुप करा दिया| यह सब देख गणेश को काफी दुख हुआ परंतु वह अपने दादा जी की मदद भी नहीं कर पा रहा था जिससे उसे काफी चोट पहुँच रही थी| ऐसे ही वक्त बितता गया, एक दिन अचानक से मोहन की तबियत बिगड़ गई| उसे काफी तकलीफ हो रही थी | अपने तकलीफ से परेशान होकर उसने अपने बेटे गणेश को डाॅक्टर को बुला देने को कहा| चुकि बेटे ने अपने पापा के हरकतों से अवगत था और उसने अपने दादा जी की हालत को देखते हुए एक उपाय सोचा कि अभी अच्छा मौका है पापा को सबक सिखाने का और उसने पापा के सारे हरकतों को याद करते हुए डाॅक्टर बुलाने से इंकार कर दिया|

 अपनी हालत पर तरस खाते हुए जब वह सामने की विस्तर पर अपने पिता जी को बेबस लेटा पाया तो उसे अपनी सारी पुराने बातें याद आ गई| और उसे अपने कर्मों पर पछतावा हुआ| और उसने अपने पिता जी से माफी मांंगते हुए कहा कि पिता जी अब मेरी आँखे खुल गई है अब मैं आपका पुरे मन से ख्याल रखूँगा| यह देख गणेश के चेहरे पर भी खुशियाँ आ गई और तब से वो लोग खुशी- खुशी एक साथ रहने लगे|

सीख- जैसा कर्म हम दुसरे के साथ करते हैं ठीक वैसा ही फल हमे वापस मिलती है, इसलिए हमे कर्म अच्छा करना चाहिए|

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