मुर्ख बगुला

मुर्ख बगुला

एक समय की बात है, रामपुर की पहाड़ियों के पीछे एक बहुत बड़ा जंगल था। उस जंगल का राजा मंगू शेर था। स्वभाव से वो काफी खतरनाक और निर्दयी था। जंगल में जो भी उसके हत्थे चढ़ता ,उसे वो बिना झिझक के खा जाता था। सारे जानवर मंगू से काफी डरते थे और उसके पास जाने से भी बचते थे।

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एक दिन की बात है,मंगू शेर शिकार कर बड़े चाव से अपने भोजन को खा रहा था कि अचानक से उसके गले में कुछ चुभन सा महसूस हुआ। थोड़ी देर बाद उसे पता चल चुका था कि उसके गले में हड्डी का एक बड़ा टुकड़ा फंस गया है। गले में हड्डी फंस जाने की वजह से वो हरदम दर्द से परेशान रहता था। हड्डी इस तरह फंस चुका था कि ना हड्डी बाहर निकल रहा था ना हड्डी पेट के अंदर जा रहा था।

जिसके वजह से वो शिकार भी नहीं कर पा रहा था। दिन प्रतिदिन भोजन ना मिलने के कारण वो कमजोर होता जा रहा था। उसने अपने जंगल के कई जानवरों से मदद की मांग भी की परन्तु सभी उसके स्वभाव से अवगत थे। कोई भी उसकी मदद करने को तैयार ना हुआ।भला उसकी मदद कर अपने मौत को दावत कौन देता? एक दिन अपने गुफा में बैठे जब मंगू अपने किस्मत को कोस रहा था कि उसकी नजर पिकू बगुले पर पड़ी। उसने सोचा इसके चोंच काफी लंबे है, ये मेरी गले की हड्डी को आराम से निकाल सकता है।

ये सोचते-सोचते मंगू पीकू की ओर बढ़ा और कहा – मित्र, मेरे इस कठिन समय में सिर्फ तुम ही मेरे काम आ सकते हो। इस हड्डी के कारण मैं बड़े दर्द में हूँ अगर तुम अपने लंबे चोंच की मदद से यदि मेरे गले की हड्डी निकाल कर इस दर्द से छुटकारा दिला दो तो मैं सदा तुम्हारा कृतज्ञ रहूंँगा। पीकू बगुला शेर के बुरे व्यवहार से भले-भांति वाकिफ था, इसलिए उसने पहले तो उसे मना कर दिया।

मंगू शेर जानता था कि खुद को बचाने का यह आखिरी मौका है इसलिए उसने कहा भाई, फिर से सोच लो अगर तुम मेरी मदद करते हो तो इस जंगल के तालाब के सारे मछलियाँ तुम्हारे और साथ-साथ अब से तुम्हें मेरे साथ राजशाही जीवन जीने का भी मौका मिलेगा। पीकू था तो समझदार परन्तु मंगू ने उसे इतनी लालसा दे दी थी कि उसकी बुद्धि भ्रष्ट हो चुकी थी। लालच में पीकू बगुला ने कहा ठीक है मित्र अब तुम इतना कहते हो तो मैं तुम्हारी मदद करने को तैयार हूंँ।

धीरे-धीरे कर बगुले ने चोंच शेर के मुँह के अंदर डाला और हड्डी के टुकड़े को बाहर निकाल दिया। शेर को पहले की अपेक्षा काफी राहत महसूस हो रही थी।चुकी वो काफी दिनों से भूखा था तो उसे भूख भी काफी जोड़ से लगी थी। उसने अपने सामने बगुले को बैठा देखा और उसी पर झप्पटा मार कर चट कर गया। पीकू बगुला लालच के नशे में इतना चूर हो गया था कि वो मंगू शेर की स्वभाव से परिचित होने के बावजूद उसकी मदद करने चला था जो उसकी मौत का कारण बनी।

सीख – हमें यह सीख मिलती है कि अगर हम लालच में आकर किसी बुरे व्यक्ति की मदद करेंगे तो वो आज ना कल हमारे स्वयं के ही मौत का कारण बनेगी।

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