अम्माँ अम्माँ यहाँ आ जाओ by Rasika Agashe

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अम्माँ अम्माँ यहाँ आ जाओ
बाहर बिखरी धूप बटेरों
छन छन छन जो गिरती है
उसका एक पहाड़ बनाओ

अम्माँ अम्माँ यहाँ आ जाओ
आओ बादल फूँकते हैं
यहाँ वहाँ जो रुई रुई है
मुट्ठी में भर लेते हैं

अम्माँ अम्माँ यहाँ आ जाओ
बर्फ़ की गद्दी बनाते हैं 
मलमल का दुपट्टा तेरे
ओढ़, घर घर खेलते हैं

रसिका अगाशे
beingrasika@gmail.com

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