मेहनत से सीख

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मेहनत से सीख

किसी गाँव मे दो जिगरी दोस्त राम और मोहन रहते थें| दोनों की दोस्ती काफी मजबूत थी| दोनों साथ स्कूल आते – जाते थें| दोनों दोस्तों मे से मोहन काफी मेहनती और तेज था | वह किसी भी काम को असानी से पूरा कर लेता था, लेकिन राम बहुत आलसी और सुस्त था|

स्कूल से घर तक मे जो भी काम मिलते थे वो मोहन तो असानी से पूरा कर लेता था, लेकिन राम हमेशा मदद के लिए अपने दोस्त के पास जाता था और उसे बोलता कि वो उसके काम को खत्म कर दे| राम के इस स्वभाव से उसका दोस्त मोहन काफी उदास रहता था|

लेकिन वो उसके काम को खत्म कर देता था इस वजह से राम को कुछ मेहनत ही नही करनी पड़ती| एक दिन मोहन ने सोचा की कुछ तरीका सोचना होगा जिससे राम का काम मे मन लगे और वो अपना काम खुद पुरा करे| एक दिन मोहन और राम दोनों को स्कूल मे कुछ काम दिये गए तो मोहन बहुत खुश हुआ की यही सही मौका है राम को एहसास दिलाने का कि हमे अपना काम खुद करना चाहिए|

अचानक मोहन ने राम से दोस्ती थोड़ी कम कर दी और वो अपना काम करने मे ही व्यस्त रहता| कभी राम आता मदद मांगने तो वो मदद करने से इंकार कर देता| यही सिलसिला चलता रहा तो राम ने सोचा की अब किसी और से मदद लेनी होगी लेकिन सभी ने उसकी मदद करने से इंकार कर दिया है|

तो राम ने बोला की अब तो मुझे ही खुद अपना स्कूल का काम भी पुरा करना होगा| उसने कोशिश करना शुरू किया और दिन रात मेहनत करने लगे की उसका सभी सहपाठी से काम अच्छा हो| और वो दिन आ गए, राम काफी खुशी- खुशी स्कूल की और चला वहा पहुँचा तो मोहन ने उसकी खुशी देखते ही सोचा की शायद इसने अपनी काम पूरी की है |

कक्षा मे अध्यापक आए सभी ने राम का मेहनत का तारीफ किया और मोहन ने उसे गले लगाई और बताई की उसने क्यु उसके काम को करने से इंकार किया था| सभी राम के काम से खुश हुए | और फिर उस दिन से राम भी काफी मेहनत करने लगे|

 इसलिए हमे अपना काम खुद करना चाहिए, दूसरे के भरोसे हमे हाथ पे हाथ धरे नही रहना चाहिए|

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